सिध्यन्ति चास्य संकल्पा विज्ञानं च प्रवर्तते धूतपापः स तेजस्वी लघ्वाहारो जितेन्द्रियः //
इस अध्याय का पचपनवाँ श्लोक—मूल संस्कृत पाठ यहाँ उपलब्ध नहीं है; इसलिए यथार्थ अनुवाद संभव नहीं।