शौचम् आचारतः शुद्धिर् इन्द्रियाणां च संयमः एतैर् विवर्धते तेजः पाप्मानम् उपहन्ति च //
इस अध्याय का चौवनवाँ श्लोक—मूल संस्कृत पाठ यहाँ उपलब्ध नहीं है; इसलिए यथार्थ अनुवाद संभव नहीं।