ज्ञानदीपेन दीप्तेन पश्यत्य् आत्मानम् आत्मना दृष्ट्वात्मानं तथा यूयं विरागा भवत द्विजाः //
इस अध्याय का चौबीसवाँ श्लोक—मूल शब्द दिए नहीं गए; इसलिए केवल पाठ-अनुपलब्धि की सूचना लिखी जा रही है।