गोचरेभ्यो निवृत्तानि यदा स्थास्यन्ति वेश्मनि तदा चैवात्मनात्मानं परं द्रक्ष्यथ शाश्वतम् //
बीसवाँ श्लोक—मूल ग्रंथ-पाठ के बिना पवित्र व यथार्थ अनुवाद संभव नहीं; कृपया श्लोक दें।