किं तेषां जीवितेनेह पशुवच् चेष्टितेन च येषां न प्रवणं चित्तं वासुदेवे जगन्मये //
यहाँ नवम श्लोक—इस प्रकार धर्म की महिमा पुराणों में प्रतिपादित है; इसलिए नित्य धर्म में स्थित होकर शांति प्राप्त करनी चाहिए।