स हि देवो महातेजाः प्रजाहितचिकीर्षया धर्मार्थं पुरुषव्याघ्र ऋषिकोटीः ससर्ज च //
यह ब्रह्मपुराण का बावनवाँ श्लोक है; मूल संस्कृत-पाठ यहाँ उपलब्ध नहीं है।