संसारे ऽस्मिन् महाघोरे भैरवे लोमहर्षणे भ्रमन्ति सुचिरं कालं पुरुषाश् चाल्पमेधसः //
यहाँ पाँचवाँ श्लोक—धर्म के लिए पवित्र वचन प्रवर्तित होता है; जो श्रद्धा से सुनता है, वह पुण्यफल प्राप्त करता है।