शरण्यः सर्वभूतानां दीनानां पालने रतः श्रुतवान् अथ संपन्नः सर्वभूतनमस्कृतः //
यह अट्ठाईसवाँ पद्य ग्रन्थांक में निर्दिष्ट है; मूल श्लोक के अभाव से अनुवाद उपलब्ध नहीं हो सकता।