प्राणातिपाताद् विरताः शीलवन्तो दयान्विताः तुल्यद्वेष्यप्रिया दान्ता मुच्यन्ते कर्मबन्धनैः //
यह आठवाँ श्लोक-पद मोक्षमार्ग के सूक्ष्म तत्त्व को प्रकट करता है।