शिव उवाच देवि धर्मार्थतत्त्वज्ञे धर्मनित्ये उमे सदा सर्वप्राणिहितः प्रश्नः श्रूयतां बुद्धिवर्धनः //
यह ब्रह्मपुराण का चतुर्थ श्लोक-पद पवित्र अर्थ का निर्देश करता है।