क्रान्तौ विष्णुर् बले शक्रः कोष्ठे ऽग्निर् भोक्तुम् इच्छति कर्णयोः प्रदिशः श्रोत्रे जिह्वायां वाक् सरस्वती //
यहाँ श्लोक-संख्या ‘९’ का निर्देश है; मूल पाठ उपलब्ध नहीं है।