कर्णौ त्वक् चक्षुषी जिह्वा नासिका चैव पञ्चमी दश तानीन्द्रियोक्तानि द्वाराण्य् आहारसिद्धये //
यहाँ श्लोक-संख्या ‘१०’ का संकेत है; मूल श्लोक उपलब्ध नहीं है।