गिरिशृङ्गे तथा चैत्ये वृक्षमूलेषु योजयेत् संनियम्येन्द्रियग्रामं कोष्ठे भाण्डमना इव //
अध्याय 236 का श्लोक 60 मूल पाठ के बिना है; इसलिए उसका अर्थानुवाद देना संभव नहीं।