आसीनो हि रहस्य् एको गच्छेद् अक्षरसाम्यताम् प्रमोहो भ्रम आवर्तो घ्राणं श्रवणदर्शने //
इस अध्याय का सत्तावनवाँ श्लोक (५७) इसी क्रम में आता है।