ततः श्रोत्रं ततश् चक्षुर् जिह्वा घ्राणं च योगवित् तत एतानि संयम्य मनसि स्थापयेद् यदि //
यहाँ मूल संस्कृत श्लोक उपलब्ध नहीं है; केवल ‘51’ संख्या दी गई है। कृपया श्लोक का पाठ भेजें, तब मैं शास्त्रीय अनुवाद दूँगा।