तस्माद् योगं मुने ब्रूहि विस्तरेण विमुक्तिदम् सांख्यं च द्विपदां श्रेष्ठ श्रोतुम् इच्छामहे वयम् //
यहाँ केवल श्लोक संख्या 2 का संकेत है; मूल श्लोक यहाँ प्रस्तुत नहीं है।