षड्विंशं विमलं बुद्धम् अप्रमेयं सनातनम् सततं पञ्चविंशं तु चतुर्विंशं विबुध्यते //
अष्टम श्लोक—मूल संस्कृत पाठ अनुपलब्ध है; इसलिए सुनिश्चित अनुवाद नहीं किया जा सकता।