षड्विंशो ऽयम् इति प्राज्ञो गृह्यमाणो ऽजरामरः केवलेन बलेनैव समतां यात्य् असंशयम् //
यह अध्याय 245 का सत्रहवाँ श्लोक है; इसका पाठ यहाँ संख्या-रूप में निर्दिष्ट है।