व्यास उवाच गदतो मे मुनिश्रेष्ठाः श्रूयताम् इदम् आदरात् नरावतारे कृष्णेन दग्धा वाराणसी यथा //
यह तृतीय श्लोक है—पवित्र पुराण-वचन को श्रद्धा से सुनना चाहिए और धर्मार्थ उसे मन में धारण करना चाहिए।