अक्षरं क्षरम् आत्मानम् अबुद्धत्वाद् धि मन्यते एवम् अप्रतिबुद्धत्वाद् अबुद्धजनसेवनात् //
बावनवाँ श्लोक (52) — इसका मूल पाठ यहाँ उपलब्ध नहीं है; अतः केवल श्लोक-संख्या का निर्देश दिया गया है।