एवं द्वंद्वान्य् अतीतानि मम वर्तन्ति नित्यशः मत्त एतानि जायन्ते प्रलये यान्ति माम् अपि //
यहाँ श्लोक-संख्या चौंतीस बताई गई है; मूल श्लोक यहाँ दिया नहीं गया है।