Previous Verse
Next Verse

Srimad Bhagavatam — Ekadasha Skandha, Shloka 28

The Disappearance of the Yadu Dynasty and Lord Kṛṣṇa’s Departure

बिभ्रच्चतुर्भुजं रूपं भ्राजिष्णु प्रभया स्वया । दिशो वितिमिरा: कुर्वन् विधूम इव पावक: ॥ २८ ॥ श्रीवत्साङ्कं घनश्यामं तप्तहाटकवर्चसम् । कौशेयाम्बरयुग्मेन परिवीतं सुमङ्गलम् ॥ २९ ॥ सुन्दरस्मितवक्त्राब्जं नीलकुन्तलमण्डितम् । पुण्डरीकाभिरामाक्षं स्फुरन्मकरकुण्डलम् ॥ ३० ॥ कटिसूत्रब्रह्मसूत्रकिरीटकटकाङ्गदै: । हारनूपुरमुद्राभि: कौस्तुभेन विराजितम् ॥ ३१ ॥ वनमालापरीताङ्गं मूर्तिमद्भ‍िर्निजायुधै: । कृत्वोरौ दक्षिणे पादमासीनं पङ्कजारुणम् ॥ ३२ ॥

bibhrac catur-bhujaṁ rūpaṁ bhrājiṣṇu prabhayā svayā diśo vitimirāḥ kurvan vidhūma iva pāvakaḥ

भगवान् अपनी ही प्रभा से दीप्त चार-भुज रूप धारण किए थे; धूमरहित अग्नि की भाँति वे चारों दिशाओं का अंधकार हर रहे थे। उनका घनश्याम शरीर तप्त सुवर्ण-सी कान्ति से दमकता था और वक्ष पर श्रीवत्स-चिह्न शोभित था। वे रेशमी वस्त्र-युगल धारण किए, अत्यन्त मंगलमय थे। उनके कमल-मुख पर सुन्दर मुस्कान थी, नील केश लहराते थे, कमल-से नेत्र मनोहर थे और मकराकार कुण्डल चमक रहे थे। कटिबन्ध, यज्ञोपवीत, मुकुट, कटक, अंगद, हार, नूपुर तथा राजचिह्नों और कौस्तुभ-मणि से वे विभूषित थे। वनमाला से अलंकृत अंगों के चारों ओर उनके निज आयुध मूर्तिमान होकर स्थित थे; वे दाहिनी जाँघ पर बाएँ चरण को रखे, कमल-लाल तलवों सहित, आसन लगाए बैठे थे।

बिभ्रत्bearing
बिभ्रत्:
कर्ता (Karta/Subject; participial)
TypeVerb
Root√भृ (धातु)
Formशतृ-प्रत्ययान्त वर्तमानकृदन्त (Present active participle), पुंलिङ्ग, प्रथमा, एकवचन
चतुर्-भुजम्four-armed
चतुर्-भुजम्:
विशेषण (Qualifier)
TypeAdjective
Rootचतुर् (प्रातिपदिक) + भुज (प्रातिपदिक)
Formनपुंसकलिङ्ग, द्वितीया, एकवचन; द्विगु-समास (चारो भुजाः यस्य/यत्) विशेषणं रूपम् प्रति
रूपम्form
रूपम्:
कर्म (Karma/Object of बिभ्रत्)
TypeNoun
Rootरूप (प्रातिपदिक)
Formनपुंसकलिङ्ग, द्वितीया, एकवचन
भ्राजिष्णुradiant, shining
भ्राजिष्णु:
विशेषण (Qualifier)
TypeAdjective
Rootभ्राजिष्णु (प्रातिपदिक)
Formनपुंसकलिङ्ग, द्वितीया, एकवचन; विशेषणं रूपम् प्रति
प्रभयाby (his) splendor
प्रभया:
करण (Karaṇa/Instrument)
TypeNoun
Rootप्रभा (प्रातिपदिक)
Formस्त्रीलिङ्ग, तृतीया-विभक्ति (Instrumental), एकवचन
स्वयाhis own
स्वया:
विशेषण (Qualifier)
TypeAdjective
Rootस्व (सर्वनाम-प्रातिपदिक)
Formस्त्रीलिङ्ग, तृतीया, एकवचन; विशेषणं प्रभया प्रति
दिशःthe directions
दिशः:
कर्म (Karma/Object of कुर्वन्)
TypeNoun
Rootदिश् (प्रातिपदिक)
Formस्त्रीलिङ्ग, द्वितीया-विभक्ति (Accusative), बहुवचन
वितिमिराःfree from darkness
वितिमिराः:
विशेषण (Qualifier)
TypeAdjective
Rootवि-तिमिर (प्रातिपदिक)
Formस्त्रीलिङ्ग, द्वितीया, बहुवचन; विशेषणं दिशः प्रति
कुर्वन्making
कुर्वन्:
कर्ता (Karta/Subject; participial)
TypeVerb
Root√कृ (धातु)
Formशतृ-प्रत्ययान्त वर्तमानकृदन्त (Present active participle), पुंलिङ्ग, प्रथमा, एकवचन
विधूमःsmokeless
विधूमः:
उपमान (Standard of comparison)
TypeAdjective
Rootवि-धूम (प्रातिपदिक)
Formपुंलिङ्ग, प्रथमा, एकवचन; उपमान-विशेषणं पावकः प्रति
इवlike, as if
इव:
सम्बन्ध (Comparative marker)
TypeIndeclinable
Rootइव (अव्यय)
Formअव्यय; उपमा-सूचक (particle of comparison)
पावकःfire
पावकः:
उपमेय (Object compared)
TypeNoun
Rootपावक (प्रातिपदिक)
Formपुंलिङ्ग, प्रथमा, एकवचन