विराट उवाच मयायं ताडितो जिह्यो न चाप्येतावदर्हति । प्रशस्यमाने यच्छूरे त्वयि षण्ढं प्रशंसति,विराटने कहा--बेटा! मैंने ही इस कुटिलको मारा है। यह इतने सम्मानके योग्य कदापि नहीं है। देखो न, जब मैं तुम्हारे शौर्यकी प्रशंसा करता हूँ, तब यह उस हिजड़ेकी बड़ाई करने लगता है
Virāṭa said: “My son, I myself struck this deceitful man; he does not deserve such honor. Look—when I praise your valor, he turns and extols that eunuch.”
विराट उवाच