Adhyāya 61: Saṃmohana-astra and the Kuru Withdrawal (संमोहनास्त्रं तथा कुरुनिवृत्तिः)
जयत: कौरवीं सेनामेकस्य मम धन्विन: । शतं मार्गा भविष्यन्ति पावकस्येव कानने,'जैसे वनमें लगे हुए दावानलको आगे बढ़नेके लिये सैकड़ों मार्ग सुलभ होते हैं, उसी प्रकार कौरवसेनापर विजय पानेवाले मुझ एकमात्र धनुर्धर वीरके लिये इसमें सैकड़ों मार्ग प्रकट हो जायँगे
“For me alone—the bowman who will prevail over the Kuru army—hundreds of paths will appear, just as a forest fire finds a hundred ways to surge forward through the woods.”
वैशम्पायन उवाच