Virāṭa-parva Adhyāya 21 — Kīcaka’s clandestine approach and Bhīma’s covert intervention (नर्तनागारे कीचकवध-प्रसङ्गः)
अपश्यं त्वां यदा कृष्णे कीचकेन पदा हताम् | तदैवाहं चिकीर्षामि मत्स्यानां कदनं महत्,कृष्णे! जब कीचकने तुम्हें लातसे मारा था, उस समय मैं वहीं था और अपनी आँखों यह घटना मैंने देखी थी। उसी क्षण मेरी इच्छा हुई कि आज इन मत्स्यदेशवासियोंका महासंहार कर डालूँ
भीमसेन उवाच