समागमेन पुत्रस्य सावित्र्या दर्शनेन च । चक्षुषश्चात्मनो लाभात् त्रिभिर्दिष्ट्या विवर्धसे,बड़े सौभाग्यकी बात है कि आपको पुत्रका समागम प्राप्त हुआ, बहू सावित्रीका दर्शन हुआ और अपने खोये हुए नेत्र पुन: मिल गये। इन तीनों बातोंसे आपका अभ्युदय सूचित होता है
By reunion with your son, by beholding Sāvitrī, and by the recovery of your own sight, you prosper through these three blessings of good fortune.
मार्कण्डेय उवाच