रामस्य पम्पातीरगमनम्, सुग्रीवसख्यं, वालिवधः, सीतारक्षणवृत्तान्तश्च
Rāma at Pampā; alliance with Sugrīva; Vālin’s fall; Sītā’s guarded captivity
त्वामेवाहु: परं बीज॑ निधानं सर्वसम्पदाम् । त्वया नाथेन देवेश सर्वापद्भ्यो भयं न हि,'ज्ञानी पुरुष तुम्हें ही इस जगत्का परम बीज और सम्पूर्ण सम्पदाओंकी निधि बतलाते हैं। देवेश्वर! यदि तुम मेरे रक्षक हो तो मुझपर सारी विपत्तियाँ टूट पड़ें, तो भी मुझे उनसे भय नहीं है!
“The wise declare You to be the supreme seed of this world and the treasury of all prosperity. O Devēśa, Lord of the gods! If You are my protector, then even if every calamity crashes upon me, I have no fear.”
वैशम्पायन उवाच