इन्द्रस्य दुःखप्राप्तिः—त्रिशिरोवधः, वृत्रोत्पत्तिः, जृम्भिकाजननम्
Indra’s Distress: Slaying of Triśiras, Birth of Vṛtra, and the Origin of Yawning
अप्सरस ऊचु: तथा यत्नं करिष्याम: शक्र तस्य प्रलोभने । यथा नावाप्स्यसि भयं तस्माद् बलनिषूदन,अप्सराएँ बोलीं--शक्र! बलनिषूदन! हमलोग विश्वरूपको लुभानेके लिये ऐसा यत्न करेंगी, जिससे उनकी ओरसे आपको कोई भय नहीं प्राप्त होगा
The Apsarases said: “So shall we strive, O Śakra, slayer of hostile might: we will make such efforts to entice Viśvarūpa that no fear will come to you from him.”
शल्य उवाच