Śikhaṇḍinī’s Disclosure, Drupada’s Counsel, and the Petition to Yakṣa Sthūṇākarṇa
Udyoga Parva 192
जहास सस्वनं हासं वाक््यं चेदमुवाच ह । न हि यावद् रणे पार्थ बाणशड्खधनुर्धरम्,बड़े-बड़े अस्त्रोंके ज्ञाता कर्णने पाँच ही दिनोंमें पाण्डवसेनाको नष्ट करनेकी प्रतिज्ञा की। सूतपुत्रका यह कथन सुनकर गंगानन्दन भीष्मजी ठहाका मारकर हँस पड़े और यह वचन बोले--'राधापुत्र! जबतक युद्धभूमिमें शंख, बाण और धनुष धारण करनेवाले श्रीकृष्णसहित अर्जुनको तुम एक ही रथसे आते हुए नहीं देखते और जबतक उनके साथ तुम्हारी मुठभेड़ नहीं होती, तभीतक ऐसा अभिमान प्रकट करते हो, तुम इच्छानुसार और भी ऐसी बहुत-सी बहकी-बहकी बातें कह सकते हो”
sañjaya uvāca | jahāsa sasvanaṃ hāsaṃ vākyaṃ cedam uvāca ha | na hi yāvad raṇe pārtha bāṇaśaṅkhadhanurdharam |
Sañjaya said: Bhīṣma laughed aloud with a resonant laugh and then spoke these words: “O Pārtha, so long as, on the battlefield, you do not behold the wielder of arrows, conch, and bow …”
संजय उवाच