Śāṇḍilī–Suparṇa Saṃvāda
Conduct, Intention, and Restoration
जिस दिशाका तुमने सबसे पहले वर्णन किया है, उसी दिशाकी ओर पहले चलो; क्योंकि उस दिशामें तुमने देवताओंका सांनिध्य बताया है तथा वहीं सत्य और धर्मकी स्थितिका भी भलीभाँति प्रतिपादन किया है। अरुणके छोटे भाई गरुड़! मैं सम्पूर्ण देवताओंसे मिलना और पुन: उन सबका दर्शन करना चाहता हूँ ।। नारद उवाच तमाह विनतासूनुरारोहस्वेति वै द्विजम् । आरुरोहाथ स मुनिर्गरुडं गालवस्तदा,नारदजी कहते हैं--तब विनतानन्दन गरुड़ने विप्रवर गालवसे कहा--“तुम मेरे ऊपर चढ़ जाओ।” तब गालव मुनि गरुड़की पीठपर जा बैठे
nārada uvāca | tam āha vinatāsūnur ārohasveti vai dvijam | ārurōhātha sa munir garuḍaṃ gālavastadā ||
Narada said: Then Garuḍa, the son of Vinatā, addressed the eminent brahmin (Gālava): “Mount upon me.” Thereupon the sage Gālava climbed onto Garuḍa’s back.
नारद उवाच