Śaraṇāgata-Atithi-Dharma in the Kapota Narrative (कपोत-आख्यानम्—शरणागतधर्मः)
निराहारस्य सुमहान् मम कालोडभिधावत: । न विद्यते5प्युपायश्व कश्रनिन्मे प्राणधारणे,“मैं भोजन न मिलनेके कारण उसकी प्राप्तिके लिये इधर-उधर दौड़ रहा हूँ। इसी प्रयत्नमें एक लंबा समय व्यतीत हो गया, किंतु मेरे प्राणोंकी रक्षाके लिये अबतक कोई उपाय हाथ नहीं आया
“Because I have found no food, I have been running here and there in search of it. In this effort a long time has passed, yet even now I have found no means by which to sustain my life.”
घपच उवाच