Vyāghra–Gomāyu Saṃvāda (व्याघ्रगोमायु संवाद) — Testing Character Beneath Appearances
संतापिताश्न ये केचिद् व्यसनौघप्रतीक्षिण: । अन्तर्तहिता: सोपदहितास्ते सर्वे परसाधना:,“जो अपने पदसे गिरा दिये जानेके कारण असंतुष्ट हों, अपमानित किये गये हों, जो स्वयं राजासे पुरस्कृत होकर दूसरोंके द्वारा कलंक लगाये जानेके कारण उस आदरसे वंचित कर दिये गये हों, जो क्षीण, लोभी, क्रोधी, भयभीत और धोखेमें डाले गये हों, जिनका सर्वस्व छीन लिया गया हो, जो मानी हों, जिनकी आय छिन गयी हो, जो महत्त्वपूर्ण पद पाना चाहते हों, जिन्हें सताया गया हो, जो किसी राजापर आनेवाले संकटसमूहकी प्रतीक्षा कर रहे हों, छिपे रहते हों और मनमें कपटभाव रखते हों, वे सभी सेवक शत्रुओंका काम बनानेवाले होते हैं
santāpitāśn ye kecid vyasanaugha-pratīkṣiṇaḥ | antartahitāḥ sopadahitās te sarve para-sādhanāḥ ||
Bhishma said: Those attendants who are embittered and distressed—who wait for a flood of calamities to befall their king; who remain hidden, nursing resentment; who are deceitful and secretly set on harm—all such men become instruments for the enemy.
भीष्म उवाच