Yudhiṣṭhira’s Lament and Kṛṣṇa’s Rudra-Cosmogony Explanation (सौप्तिक पर्व, अध्याय १७)
कथं नु कृष्ण पापेन क्षुद्रेणाकृतकर्मणा । द्रौणिना निहता: सर्वे मम पुत्रा महारथा:,“श्रीकृष्ण! नीच एवं पापात्मा द्रोणकुमारने कोई विशेष तप या पुण्यकर्म भी तो नहीं किया था, जिससे उसमें अलौकिक शक्ति आ जाती। फिर उसने मेरे सभी महारथी पुत्रोंका वध कैसे कर डाला?
“How, O Kṛṣṇa, did the sinful, petty Drauṇi—who has performed no worthy deed—slay all my sons, those great chariot-warriors?”
वैशम्पायन उवाच