अध्याय १: उत्पात-दर्शनम् तथा वृष्णि-विनाश-श्रवणम्
Omens Observed and the Hearing of the Vṛṣṇi Destruction
येन यूयं सुदुर्वत्ता नृशंसा जातमन्यव: । उच्छेत्तार: कुलं कृत्स्नमृते रामजनार्दनी,राजन! जन दुर्बुद्धि बालकोंके वज्चनापूर्ण बर्तावसे वे सभी महर्षि कुपित हो उठे। क्रोधसे उनकी आँखें लाल हो गयीं और वे एक-दूसरेकी ओर देखकर इस प्रकार बोले -- क्रूर, क्रोधी और दुराचारी यादवकुमारो! भगवान् श्रीकृष्णका यह पुत्र साम्ब एक भयंकर लोहेका मूसल उत्पन्न करेगा जो वृष्णि और अन्धकवंशके विनाशका कारण होगा। उसीसे तुम लोग बलराम और श्रीकृष्णके सिवा अपने शेष समस्त कुलका संहार कर डालोगे। हलधारी श्रीमान् बलरामजी स्वयं ही अपने शरीरको त्यागकर समुद्रमें चले जायँगे और महात्मा श्रीकृष्ण जब भूतलपर सो रहे होंगे उस समय जरा नामक व्याध उन्हें अपने बाणोंसे बींध डालेगा
vaiśampāyana uvāca | yena yūyaṃ sudurvṛttā nṛśaṃsā jātamanyavaḥ | ucchettāraḥ kulaṃ kṛtsnam ṛte rāmajanārdanī ||
Vaiśampāyana said: “By this deed you have become utterly depraved—cruel, violent, and inflamed with anger—fit to cut down your entire lineage, sparing only Rāma and Janārdana.”
वैशम्पायन उवाच