अमीमृदत् सर्वपातेडद्य कर्णो हास्त्रैरस्त्र किमिदं भो किरीटिन् | स वीर कि मुहा[सि नावधत्से नदन्त्येते कुरव: सम्प्रहृष्टा:,तदनन्तर वसुदेवनन्दन भगवान् श्रीकृष्णने भी अर्जुनके रथसम्बन्धी बाणोंको कर्णके द्वारा नष्ट होते देख उनसे इस प्रकार कहा “किरीटधारी अर्जुन! यह क्या बात है? तुमने अबतक जितने बार प्रहार किये हैं, उन सबमें कर्णने तुम्हारे अस्त्रको अपने अस्त्रोंद्वारा नष्ट कर दिया है। वीर! आज तुमपर कैसा मोह छा रहा है? तुम सावधान क्यों नहीं होते? देखो, ये तुम्हारे शत्रु कौरव अत्यन्त हर्षमें भरकर सिंहनाद कर रहे हैं!
sañjaya uvāca | amīmṛdat sarvapātaiḥ adya karṇo hāstair astra-kim idaṃ bho kirīṭin | sa vīra kiṃ mohāsi nāvadhatse nadanty ete kuravaḥ samprahṛṣṭās ||
Sanjaya said: “Today Karna has shattered every one of your volleys with his own weapons. What is this, O Kirīṭin (Arjuna)? O hero, what delusion has come over you that you do not stay alert? Look—these Kurus, your enemies, are roaring in triumph, exultant at what they see.”
संजय उवाच