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Shloka 20

महाग्रहाविव क्रुद्धौ युगान्ताय समुत्थितौ । देवगर्भी देवबलौ देवतुल्यौ च रूपत:,वे दोनों पुरुषसिंह रथपर विराजमान और रथियोंमें श्रेष्ठ थे। दोनोंने विशाल धनुष धारण किये थे। दोनों ही बाण, शक्ति और ध्वजसे सम्पन्न थे। दोनों कवचधारी थे और कमरमें तलवार बाँधे हुए थे। उन दोनोंके घोड़े श्वेत रंगके थे। वे दोनों ही शंखसे सुशोभित, उत्तम तरकससे सम्पन्न और देखनेमें सुन्दर थे। दोनोंके ही अंगोंमें लाल चन्दनका अनुलेप लगा हुआ था। दोनों ही साँड्ोंक॒े समान मदमत्त थे। दोनोंके धनुष और ध्वज विद्युत॒के समान कान्तिमान्‌ थे। दोनों ही शस्त्रसमूहोंद्वारा युद्ध करनेमें कुशल थे। दोनों ही चँवर और व्यजनोंसे युक्त तथा श्वेत छत्रसे सुशोभित थे। एकके सारथि श्रीकृष्ण थे तो दूसरेके शल्य। उन दोनों महारथियोंके रूप एक-से ही थे। उनके कंधे सिंहके समान, भुजाएँ बड़ी-बड़ी और आँखें लाल थीं। दोनोंने सुवर्णकी मालाएँ पहन रखी थीं। दोनों सिंहके समान उन्नत कंधोंसे प्रकाशित होते थे। दोनोंकी छाती चौड़ी थी और दोनों ही महान्‌ बलशाली थे। दोनों एक-दूसरेका वध चाहते और परस्पर विजय पानेकी अभिलाषा रखते थे। गोशालामें लड़नेवाले दो साँड़ोंके समान वे दोनों एक-दूसरेपर धावा करते थे। मद बहानेवाले मदोन्मत्त हाथियोंके समान दोनों ही रोषावेशमें भरे हुए थे। पर्वतके समान अविचल थे। विषधर सर्पोंके शिशुओं-जैसे जान पड़ते थे। यम, काल और अन्तकके समान भयंकर प्रतीत होते थे। इन्द्र और वृत्रासुरके समान वे एक-दूसरेपर कुपित थे। सूर्य और चन्द्रमाके समान अपनी प्रभा बिखेर रहे थे। क्रोधमें भरे हुए दो महान्‌ ग्रहोंके समान प्रलय मचानेके लिये उठ खड़े हुए थे। दोनों ही देवताओंके बालक, देवताओंके समान बली और देवतुल्य रूपवान्‌ थे। दैवेच्छासे भूतलपर उतरे हुए सूर्य और चन्द्रमाके समान शोभा पाते थे। दोनों ही समरांगणमें बलवान्‌ और अभिमानी थे। युद्धके लिये नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्र धारण किये हुए थे। प्रजानाथ! आमने-सामने खड़े हुए दो सिंहोंके समान उन दोनों नरव्याप्र वीरोंको देखकर आपके सैनिकोंको महान्‌ हर्ष हुआ

mahāgrahāv iva kruddhau yugāntāya samutthitau | devagarbhī devabalau devatulyau ca rūpataḥ ||

Sañjaya said: Like two mighty planets, blazing with wrath and risen to bring about the end of an age, those two stood forth—born of the gods, endowed with godlike strength, and equal to the gods in beauty of form. Their very presence on the battlefield foretold a world-shaking clash, driven by mutual resolve for victory and the destruction of the other.

महाग्रहौtwo great planets
महाग्रहौ:
Karta
TypeNoun
Rootमहाग्रह
FormMasculine, Nominative, Dual
इवlike/as
इव:
TypeIndeclinable
Rootइव
क्रुद्धौangry/enraged (two)
क्रुद्धौ:
Karta
TypeAdjective
Rootक्रुद्ध
FormMasculine, Nominative, Dual
युगान्तायfor the end of an age (world-destruction)
युगान्ताय:
Sampradana
TypeNoun
Rootयुगान्त
FormMasculine, Dative, Singular
समुत्थितौrisen up / stood up
समुत्थितौ:
Karta
TypeVerb
Rootसम्-उत्-स्था
FormMasculine, Nominative, Dual
देवगर्भीhaving divine origin; born of gods
देवगर्भी:
Karta
TypeAdjective
Rootदेवगर्भिन्
FormMasculine, Nominative, Dual
देवबलौof divine strength
देवबलौ:
Karta
TypeAdjective
Rootदेवबल
FormMasculine, Nominative, Dual
देवतुल्यौequal to gods
देवतुल्यौ:
Karta
TypeAdjective
Rootदेवतुल्य
FormMasculine, Nominative, Dual
and
:
TypeIndeclinable
Root
रूपतःin appearance / by form
रूपतः:
Karana
TypeIndeclinable
Rootरूप

संजय उवाच

S
Sañjaya
T
two warriors (implied: Arjuna and Karṇa in the Karṇa Parva battle context)
M
mahāgraha (great planets/celestial bodies)
Y
yugānta (end of an age)