प्रयातस्याथ पार्थस्य महान् स्वेदो व्यजायत,प्रयाहि शीघ्र॑ गोविन्द सूतपुत्रजिघांसया । “गोविन्द! अब मेरा रथ तैयार हो। उसमें पुनः उत्तम घोड़े जोते जायँ और मेरे उस विशाल रथमें सब प्रकारके अस्त्र-शस्त्र सजाकर रख दिये जायाँ। अअभ्वारोहियोंद्वारा सिखलाये और टहलाये गये घोड़े रथसम्बन्धी उपकरणोंसे सुसज्जित हो शीघ्र यहाँ आवें और आप सूतपुत्रके वधकी इच्छासे जल्दी ही यहाँसे प्रस्थान कीजिये”
sañjaya uvāca | prayātasya atha pārthasya mahān svedo vyajāyata, prayāhi śīghraṁ govinda sūtaputra-jighāṁsayā |
Sañjaya said: As Pārtha set out, a great sweat arose upon him. He urged, “Go swiftly, Govinda—driven by the resolve to slay the charioteer’s son.”
संजय उवाच