Droṇa’s Renewed Advance toward Yudhiṣṭhira; Fall of Satyajit and Allied Recoil (द्रोणस्य युधिष्ठिरप्रेप्सा—सत्यजितः पतनम्)
राजा युधिष्ठिरने द्रोणाचार्यके रचे हुए उस अलौकिक तथा शत्रुओंके लिये अजेय व्यूहको देखकर युद्धस्थलमें धृष्टद्युम्नसे इस प्रकार कहा--“कबूतरके समान रंगवाले घोड़ोंपर चलनेवाले वीर! आज तुम ऐसी नीतिका प्रयोग करो, जिससे मैं उस ब्राह्मणके वशमें न होऊँ' ।। धृष्टह्ुम्न उवाच द्रोणस्प यतमानस्य वशं नैष्यसि सुव्रत । अहमावारयिष्यामि द्रोणमद्य सहानुगम्,धृष्टद्युम्न बोले--उत्तम व्रतका पालन करनेवाले नरेश! द्रोणाचार्य कितना ही प्रयत्न क्यों न करें, आप उनके वशमें नहीं होंगे। आज मैं सेवकोंसहित द्रोणाचार्यको रोकूँगा
dhṛṣṭadyumna uvāca |
droṇasya yatamānasya vaśaṃ naiṣyasi suvrata |
aham āvārayiṣyāmi droṇam adya sahānugam ||
Dhṛṣṭadyumna said: “O king of steadfast vows, even though Droṇa strives with all his might, you will not fall under his control. Today I shall hold back Droṇa, together with his followers.”
धृष्टह्ुम्न उवाच