(दाक्षिणात्य अधिक पाठका ई श्लोक मिलाकर कुल ३७३६ “लोक हैं।) #स्न मान () अमन षडशीरत्याधिकशततमोब< ध्याय: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा ट्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध संजय उवाच त्रिभागमात्रशेषायां रात्र्यां युद्धमवर्तत । कुरूणां पाण्डवानां च संहृष्टानां विशाम्पते,संजय कहते हैं--प्रजानाथ! उस समय जब रात्रिके पंद्रह मुहूर्तोंमेंसे तीन मुहूर्त ही शेष रह गये थे, हर्ष तथा उत्साहमें भरे हुए कौरवों तथा पाण्डवोंका युद्ध आरम्भ हुआ
sañjaya uvāca |
tribhāgamātraśeṣāyāṁ rātryāṁ yuddham avartata |
kurūṇāṁ pāṇḍavānāṁ ca saṁhṛṣṭānāṁ viśāmpate ||
Sañjaya said: O lord of the people, when only a third of the night remained, the battle surged on—between the Kurus and the Pāṇḍavas, both sides exhilarated and fired with martial ardor.
संजय उवाच