नारायणास्त्र-शमनं द्रौणि-प्रहारश्च
Pacification of the Nārāyaṇāstra and Drauni’s Renewed Assault
अतड-४--क+ एकोनसप्तत्याधिकशततमो< ध्याय: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध संजय उवाच नकुलं॑ रभसं युद्धे निघ्नन्तं वाहिनीं तव । अभ्ययात् सौबल: क्रुद्धस्तिष्ठ तिछेति चाब्रवीत्,संजय कहते हैं--राजन्! वेगशाली नकुल युद्धमें आपकी सेनाका संहार कर रहे थे। उनका सामना करनेके लिये क्रोधमें भरा हुआ सुबलपुत्र शकुनि आया और बोला “अरे! खड़ा रह, खड़ा रह' इस प्रकार श्रीमह्याभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके समय संकुलयुद्धविषयक एक सौ उनहठत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ १६९ ॥/ नस ह्य ४-3 सप्तत्याधेकशततमो< ध्याय: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टदय्युम्नद्वारा द्रमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण संजय उवाच तस्मिन् सुतुमुले युद्धे वर्तमाने भयावहे । धृष्टद्युम्नो महाराज द्रोणमेवाभ्यवर्तत
sañjaya uvāca
nakulaṁ rabhasaṁ yuddhe nighnantaṁ vāhinīṁ tava |
abhyayāt saubalaḥ kruddhas tiṣṭha tiṣṭheti cābravīt ||
Sañjaya said: O King, the impetuous Nakula was cutting down your army in the battle. Enraged, Śakuni—the son of Subala—advanced to confront him and cried, “Stand! Stand!”
संजय उवाच