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Shloka 23

विभूति-योगः (Vibhūti-yoga) — Exemplary Manifestations as a Contemplative Index

सम्बन्ध-- आठवें और दसवें शलोकोंमें अधियज्ञकी उपासनाका फल परम दिव्य पुरुषकी प्राप्ति; तेरहवें *लोकमें परम अक्षर निर्गुण ब्रह्ममीे उपासनाका फल परमगतिकी प्राप्ति और चौदहवें शलोकमें सगुण-साकार भगवान्‌ श्रीकृष्णणी उपासनाका फल भगवान्‌की प्राप्ति बतलाया गया है। इससे तीनोंगें किसी प्रकारके भेदका भ्रम न हो जाय; इस उद्देश्यसे अब सबकी एकताका प्रतिपादन करते हुए उनकी प्राप्तिके बाद पुनर्जन्मका अभाव दिखलाते हैं-- अव्यक्तोक्षर इत्युक्तस्तमाहु: परमां गतिम्‌ । य॑ं प्राप्प न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम,सम्बन्ध-- अर्जुनके सातवें प्रश्नका उत्तर देते हुए भगवान्‌ने अन्तकालमें किस प्रकार मनुष्य परमात्माको प्राप्त होता है; यह बात भलीभाँति समझायी। प्रसंगवश यह बात भी कही कि भगवत्प्राप्ति न होनेपर ब्रह्मलोकतक पहुँचकर भी जीव आवागमनके चक्‍्करसे नहीं छूटता: परंतु वहाँ यह बात नहीं कही गयी कि जो वापस न लौटनेवाले स्थानको प्राप्त होते हैं; वे किस रास्तेसे और कैसे जाते हैं तथा इसी प्रकार जो वापस लौटनेवाले स्थानोंकी प्राप्त होते हैं. वे किस रास्तेसे जाते हैं। अत: उन दोनों मार्गोका वर्णन करनेके लिये भगवान्‌ प्रस्तावना करते हैं-- यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्ति चैव योगिन: । प्रयाता यान्ति तं काल॑ वक्ष्यामि भरतर्षभ हे अर्जुन! जिस कालमें* शरीर त्यागकर गये हुए योगीजनः तो वापस न लौटनेवाली गतिको और जिस कालमें गये हुए वापस लौटनेवाली गतिको ही प्राप्त होते हैं, उस कालको अर्थात्‌ दोनों मार्गोंको कहूँगा

यत्रwhen/where (in which condition/time)
यत्र:
Adhikarana
TypeIndeclinable
Rootयत्र
कालेat the time
काले:
Adhikarana
TypeNoun
Rootकाल
FormMasculine, Locative, Singular
तुbut/indeed
तु:
TypeIndeclinable
Rootतु
अनावृत्तिम्non-return (no rebirth)
अनावृत्तिम्:
Karma
TypeNoun
Rootअनावृत्ति
FormFeminine, Accusative, Singular
आवृत्तिम्return (rebirth)
आवृत्तिम्:
Karma
TypeNoun
Rootआवृत्ति
FormFeminine, Accusative, Singular
and
:
TypeIndeclinable
Root
एवindeed/only
एव:
TypeIndeclinable
Rootएव
योगिनःyogis
योगिनः:
Karta
TypeNoun
Rootयोगिन्
FormMasculine, Nominative, Plural
प्रयाताःhaving departed (having gone forth)
प्रयाताः:
TypeVerb
Rootप्र-या
Formkta (past passive participle), Masculine, Nominative, Plural
यान्तिgo/attain
यान्ति:
TypeVerb
Rootया
FormPresent (Lat), Third, Plural, Parasmaipada
तम्that
तम्:
Karma
TypePronoun
Rootतद्
FormMasculine, Accusative, Singular
कालम्time
कालम्:
Karma
TypeNoun
Rootकाल
FormMasculine, Accusative, Singular
वक्ष्यामिI shall tell
वक्ष्यामि:
TypeVerb
Rootवच्
FormSimple Future (Lrt), First, Singular, Parasmaipada
भरतर्षभO bull among the Bharatas (best of Bharatas)
भरतर्षभ:
Sampradana
TypeNoun
Rootभरत-ऋषभ
FormMasculine, Vocative, Singular

अजुन उवाच