Vītahavya’s Attainment of Brāhmaṇya (Vītahavya–Vipratva) | वीतहव्यस्य ब्राह्मण्यप्राप्तिः
तांश्ेज्जयति शत्रून् स तदा प्राप्नोति सद्गतिम् । अथ ते वै जयन्त्येनं तालाग्रादिव पात्यते,यदि वह इन शत्रुओंको जीत लेता है तो सदगतिको प्राप्त होता है और यदि वे शत्रु ही उसे जीत लेते हैं तो ताड़के वृक्षके ऊपरसे गिरनेवाले फलकी भाँति वह नीचे गिरा दिया जाता है
Bhishma said: “If he conquers these enemies, he attains sadgati—the good course and blessed end. But if those enemies conquer him, he is cast down, like a fruit falling from the top of a palm tree.”
भीष्म उवाच