ज्येष्ठ-कनिष्ठ-धर्मः — Duties of Elders and Juniors
Anuśāsana-parva 108
न चेर्ष्या स्त्रीषु कर्तव्या रक्ष्या दाराश्व सर्वश: । अनायुष्या भवेदीर्ष्या तस्मादीर्ष्या विवर्जयेत्,सभी उपायोंसे अपनी स्त्रीकी रक्षा करनी चाहिये। स्त्रियोंसे ईर्ष्या रखना उचित नहीं है। ईर्ष्या करनेसे आयु क्षीण होती है। इसलिये उसे त्याग देना ही उचित है
भीष्म उवाच