Strī Parva, Adhyāya 2 — Vidura’s Consolation on Kāla, Karma, and the Limits of Lamentation (विदुरोपदेशः)
सर्वे क्षयान्ता निचया: पतनान्ता: समुच्छुया: । संयोगा विप्रयोगान्ता मरणान्तं च जीवितम्,सारे संग्रहोंका अन्त उनके क्षयमें ही है। भौतिक उन्नतियोंका अन्त पतनमें ही है। सारे संयोगोंका अन्त वियोगमें ही है। इसी प्रकार सम्पूर्ण जीवनका अन्त मृत्युमें ही होनेवाला है
“সব সঞ্চয়ের শেষ ক্ষয়েই; সব উত্থানের শেষ পতনেই; সব মিলনের শেষ বিচ্ছেদেই; আর জীবনের শেষ মৃত্যুতে।”
विदुर उवाच