एष वै सर्वकल्याण: समाधिस्तव भारत | नैनं शत्रुर्विषहते शक्रेणापि समोडप्युत,भारत! तुम्हारा यह क्षमाशीलताका नियम सब प्रकारसे कल्याणकारी है। इन्द्रके समान पराक्रमी शत्रु भी इसका सामना नहीं कर सकता
eṣa vai sarva-kalyāṇaḥ samādhis tava bhārata | nainaṃ śatrur viṣahate śakreṇāpi samo 'ḍpiyut ||
হে ভারত! ক্ষমাশীলতায় প্রতিষ্ঠিত তোমার এই দৃঢ় সংযম সর্বতোভাবে কল্যাণকর। ইন্দ্রসম পরাক্রমী শত্রুও এর মোকাবিলা করতে পারে না।
विदुर उवाच