Jarāsandha–Bhīma Niyuddha-prastāvaḥ
Commencement of the Regulated Duel
वैहारो विपुल: शैलो वराहो वृषभस्तथा । तथा ऋषिगिरिस्तात शुभाश्वैव्यकपञ्चमा:,तात! यहाँ विहारोपयोगी विपुल, वराह, वृषभ (ऋषभ), ऋषिगिरि (मातंग) तथा पाँचवाँ चैत्यक नामक पर्वत है। बड़े-बड़े शिखरोंवाले ये पाँचों सुन्दर पर्वत शीतल छायावाले वृक्षोंसे सुशोभित हैं और एक साथ मिलकर एक-दूसरेके शरीरका स्पर्श करते हुए मानो गिरिव्रज नगरकी रक्षा कर रहे हैं
vaihāro vipulaḥ śailo varāho vṛṣabhas tathā | tathā ṛṣigirir tāta śubhāśvaivyaka-pañcamāḥ ||
বায়ু বললেন—প্রিয়! এখানে বিহার নামে বিস্তৃত পর্বত আছে, আর বরাহ ও বৃষভও আছে; তদ্রূপ ঋষিগিরি আছে—এদের সঙ্গে শুভাশ্ব ও ঐব্যক পঞ্চম পর্বত।
वायुदेव उवाच