Jarāsandha as Obstacle to the Rājasūya — Kṛṣṇa’s Strategic Genealogical Brief
Sabhā Parva, Adhyāya 13
भूयश्वाद्भुतवीर्यौजा धर्ममेवानुचिन्तयन् | कि हित॑ सर्वलोकानां भवेदिति मनो दधे,हम और पराक्रमवाले धर्मराजने पुनः अपने धर्मका ही चिन्तन किया और सम्पूर्ण लोकोंका हित कैसे हो, इसी ओर वे ध्यान देने लगे
bhūyaś cādbhuta-vīryaujā dharmam evānucintayan | kiṁ hitaṁ sarva-lokānāṁ bhaved iti mano dadhe ||
পুনরায়, আশ্চর্য বীর্য ও তেজে সমৃদ্ধ ধর্মরাজ কেবল ধর্মই চিন্তা করে মনে স্থির করলেন—“সকল লোকের মঙ্গল কীসে হবে?”
वैशम्पायन उवाच