तं निर्भुग्नशिरोग्रीवम् आस्यप्रस्रुतशोणितम् विलोक्य शरणं जग्मुस् तत्पत्न्यो मधुसूदनम् //
এটি ব্রহ্মপুরাণের অষ্টত্রিংশত্তম শ্লোক-স্থান; মূল সংস্কৃত পাঠ এখানে দেওয়া নেই।