अभिशन्ञो युद्धधर्माणां वेदान्तावभूथाप्लुत: । दिव्यास्त्रविदमेयात्मा कार्तवीर्यसमो युधि,'पाण्डुनन्दन! तुम लोकमें महान् शूर और सदाचारी माने जाते हो। युद्धके धर्मोको जानते हो। वेदान्तका अध्ययनरूपी यज्ञ समाप्त करके तुम उसमें अवभूथस्नान कर चुके हो। तुम्हें दिव्यास्त्रोंका ज्ञान है। तुम अमेय आत्मबलसे सम्पन्न तथा युद्धस्थलमें कार्तवीर्य अर्जुनके समान पराक्रमी हो
sañjaya uvāca |
abhiśaṅño yuddhadharmāṇāṃ vedāntāvabhūthāplutaḥ |
divyāstravid ameyātmā kārtavīryasamo yudhi ||
সঞ্জয়ে ক’লে—পাণ্ডুনন্দন! তুমি যুদ্ধধৰ্মত সুপ্ৰশিক্ষিত। বেদান্ত অধ্যয়ন-ৰূপ যজ্ঞ সম্পন্ন কৰি যেন তাৰ অৱভৃথস্নানো কৰিছা। তুমি দিব্যাস্ত্ৰবিদ; তোমাৰ আত্মবল অমেয়; আৰু ৰণত তুমি কাৰ্তবীৰ্য অৰ্জুনৰ সমান পৰাক্ৰমী।
संजय उवाच