Saṃśaptakas in Candrārdha-vyūha; Arjuna’s Devadatta and the Traigarta Rout
Chapter 17
अद्यास्त्वनर्जुना भूमिरत्रिगर्ताथ वा पुन: । सत्यं ते प्रतिजानीमो नैतन्मिथ्या भविष्यति,“आज हम आपके सामने यह सत्य प्रतिज्ञापूर्वक कहते हैं कि यह भूमि या तो अर्जुनसे सूनी हो जायगी या त्रिर्गतोंमेंसे कोई इस भूतलपर नहीं रह जायगा। मेरा यह कथन कभी मिथ्या नहीं होगा”
আজি আমি আপোনাৰ সন্মুখত সত্য প্ৰতিজ্ঞা কৰিছোঁ—এই ভূমি হয় অৰ্জুনবিহীন হ’ব, নহ’লে ত্ৰিগর্তসকলৰ মাজত এজনো এই ভূতলত অৱশিষ্ট নাথাকিব। মোৰ এই বাক্য কেতিয়াও মিথ্যা নহ’ব।
संजय उवाच